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16 श्रृंगार - काजल (Kajal)  स्त्रीयों के 16 श्रृंगार में काजल (Kajal) का विशेष महत्व है, काजल (Kajal) आखों की सुन्दरता को बढता है आखें हमारे शरीर का सबसे नाजुक अंग होती है आखें हमारी भावनाओं को व्यक्त करती है जब सुंदर आखों की बात आती है तो काजल का नाम सबसे पहले आता है आइये जानते है 16 श्रृंगार में काजल (Kajal) का महत्व - Importance of  Kajal in 16 Shringar

16 श्रृंगार में काजल का महत्व - Importance of Kajal in 16 Shringar

शादियों में दुल्हन को काजल लगाकर बुरी नजर से भी बचाया जाता है, काजल का धार्मिक तथा वैज्ञानिक महत्व भी होता है काजल का प्रयोग बच्चों के नेत्र दोष निवारण (Eye defect prevention) के लिए भी किया है काजल का प्रयोग सदियों से किया जाता है काजल आखों को सभी रोगों से बचाता है आज भी कुछ घरों में काजल खुद ही बनाया जाता है जो आखों के लिए बहुत ही शुद्ध और लाभदायक होता है घरों में काजल बनाने का तरीका बहुत ही दिलचस्प है काजल के लिए सरसों के तेल का दीपक या बादाम को जलाया जाता है उसके ऊपर कच्ची मिटटी का बर्तन रखा जाता है इसमें से निकलने वाले वाष्प उस बर्तन पर जम जाती है जिससे सूखा काजल बनता है 

काजल को सुरमा या अंजन भी कहते हैं कई फिल्मों में काजल पर गाने भी बने है आज भी बरेली का सुरमा बहुत प्रसिद्ध है वैसे तो काजल घर पर भी बनाया जा सकता है किन्तु आज कल बाजार में कई प्रकार के आई लाइनर (Eye Liner) काजल प्रचलन में है जो आखों को सुन्दर बनाने है लेकिन एक शोध के अनुसार बाजार के काजल में लेड की मात्र बहुत होती है जो आखों के लिए बहुत ही हानिकारक होती है काजल धुल तथा धूप से भी आखों को बचाता है काजल को सभी धर्म के लोग प्रयोग करते है 

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