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हमारे हिन्दू धर्म में हर रस्म के पीछे कोई न कोई धर्मिक तथा सांस्कृतिक महत्व छुपा होता है माना जाता है की जल ही जीवन है शायद इसलिए किसी भी शुभ कार्य में कुआँ पूजा को बहुत शुभ माना जाता है शादी ब्याह हो या घर में बच्चे का जन्‍म इन सब अवसरों पर कुआँ पूजन शुभ माना जाता है इस रस्म को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है यह रस्म कई मोकों पर की जाती है जैसे शादी ब्याह या घर में बच्चे के जन्म के समय कुआँ पूजन किया जाता है आइये जानते है कुआँ पूजन की रस्म के बारे में-

कुआँ पूजन की रस्म -Kuan Poojan Ki Rasm

हमारे हिन्दू समाज में बहुत रीति-रिवाज होती है उनमे से एक है कुआँ पूजन की रस्म। यह रस्म में शादी - ब्याह में तथा बच्चे के जन्‍म के समय की जाती है हर शुभ कार्य में कुआं पूजन को बहुत शुभ मान जाता है हमारे हिन्दू धर्म में कुआंं को बहुत की पूज्यनीय माना जाता है बच्चे के जन्म के बाद कुआं पूजन (kuaa pujan) किया जाता है बच्चे के जनम के 12 वें दिन यह रस्म की जाती है इस रस्म के बाद जच्चा को पवित्र माना जाता है इस दिन जच्चा कुआँ हल्दी, चावल तथा रोली से कुआंं का पूजन करती है तथा महिलाये कुआं पूजन (kuaa pujan) के गीत गाती है जब लड़का बारात लेकर जाता है तब भी कुआं पूजन (kuaa pujan) किया जाता है

शादियों में भी कुआं पूजन (kuaa pujan) को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है घुडचढ़ी के बाद दूल्हा तथा उसके घर वाले कुआं पूजन (kuaa pujan) करने जाते है कुआं पूजन (kuaa pujan) के सामान में एक सूप में हल्दी, चावल ,बतासे ,2 मिटटी के सकोरे, एक कटोरी में सरसों का तेल और 7 कांस की सींक रखते है दूल्हा कुआँ पूजन की रस्म करता है फिर कुआँ की सात परिक्रमा करता है हर एक परिक्रमा पर दूल्हा 1 कांस की सींक कुएं में डालता है कुआँ पूजन के बाद दूल्हा तेल की कटोरी में अपना मुह देखता है और दुल्हे की माँ उसको कुछ मीठा खिलाती है उसके बाद लड़का पीछे मुड़कर नहीं देखता है तथा बारात के साथ दूल्हा दुल्हन के घर के लिए प्रस्थान करता है 



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