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16 श्रृंगार - सिंदूर (Sindoor) - सिंदूर को स्त्रियों का सुहाग चिन्ह माना जाता है ऐसा माना जाता है की  मांग में सिंदूर लगाने से पति की आयु लम्बी होती है  16 श्रृंगार में सिंदूर (Sindoor)  का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है आइये जानते है 16 श्रृंगार में सिंदूर का महत्व- Importance of Sindoor in 16 Shringar -

16 श्रृंगार में सिंदूर का महत्व- Importance of Sindoor in 16 Shringar

विवाह में फेरों के समय वर द्वारा वधू की मांग मे सिंदूर भरा जाता है इसके बाद विवाहिता स्त्री अपने पति के जीवित रहने तक अपनी मांग में सिन्दूर भरती है सिंदूर नारी के 16 श्रंगार का एक महत्वपूर्ण  अंग है सिंदूर मंगल-सूचक भी होता है विज्ञान में भी सिंदूर का महत्व  बताया गया है। सिंदूर में पारा जैसी धातु अधिक होनेके कारण चेहरे पर जल्दी झुर्रियां नहीं पडती साथ ही इससे स्त्री का मन नियंत्रित होती है मांग में जहां सिंदूर भरा जाता है, वह स्थान ब्रारंध्र और अध्मि नामक मर्म के ठीक ऊपर होता है सिंदूर मर्म स्थान को बाहरी बुरे प्रभावों से भी बचाता है। शास्त्रों में अभागिनी स्त्री के दोष निवारण के लिए मांग में सिंदूर भरने की सलाह दी गई है सिंदूर को मां पार्वती की शक्ति का प्रतीक माना जाता है भारतीय समाज में मांग में सिंन्दूर भरना स्त्रीयों के लिए सुहागिन होने की निशानी माना जाता है

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