Ads (728x90)



  Mata ke Lokgeet - Kand Kulhadi

माता के लोकगीत - कन्द कुल्हाड़ी - Mata ke Lokgeet - Kand Kulhadi

कन्द कुल्हाड़ी डाररी हो चलो ओ नंदन बन जाये भवन में , गरजत
कौन भये बल वाढई ओ कौन भये सुत हरि भवन में  ,गरजत
राम बल वाढई यो लक्ष्‍मण भये सुत धार भवन में ,गरजत
काहे रे पूजो डाररी हो काहे रे मारूये रे खम्‍भ भवन में ,गरजत
घी गुड पूजो डाररी हो एपन मारूये रे खम्‍भ भवन में ,गरजत
काहे रे काटो डाररी हो मारूये रे खम्‍भ भवन में ,गरजत
कुल्‍लड काटो डाररी हो वसूलन मारूये रे खम्‍भ भवन में ,गरजत
काहे रे लादौ डाररी हो काहे मारूये रे खम्‍भ भवन में ,गरजत
गाडिन लादौ डाररी हो गज हस्‍तेन मारूये रे खम्‍भ भवन में ,गरजत
अगवारे उल्‍टो डारूरी हो पिछवाले मारूये रे खम्‍भ भवन में ,गरजत
गढो हिडोलो सापरौ हो गढयौ झलपदेे के बाग भवन में ,गरजत
जलपदे तो झूूलन निकली सात सहेलिन झुण्‍ड भवन में ,गरजत
होले होले झूलो जलपदे मत पर्वत दहलाये भवन में ,गरजत
लागुर दीनो झोटिका हो टूूटो जलपदेे को हार भवन में ,गरजत
काहे कौ तेरो घांघरो काहे को गलहार भवन में ,गरजत
हरिय दरियायी को घाघरों ओ लौंगन की गल हार भवन में ,गरजत
ररकत आवे घाघरों ओ महके जलपदे को हार भवन में ,गरजत
काहे सकेरू मैया नौ गुरू को मुख पर उत्‍तर देओ भवन मेंं ,गरजत
हाय सकेरू मैया नौ गुरू को मुख पर उत्‍तर देओ भवन में ,गरजत
गुथ गांथ जब सापरो हो डालो जलपदेे के शीश भवन में, गरजत
मागन हो सो मागती जा रे जो मन इच्‍छा होये भवन में ,गरजत
कहा मांगू काह देऊ जलपदे कहा मेरे हतनाय भवन में ,गरजत
अनधन मैया दियौ बहुत रे मालिया अमर कर देयो भवन में ,गरजत
जाओ जा पीहरैै घर अपनेे ही त्‍यारी घन जाये नन्‍दलाला भवन में
काेेरेने राखे मैया सतिया हो चरूअन औरत दूध भवन में ,गरजत
पालन झूूलन लाल भवन में गरजत आदि भवन में ,गरजत
अमर न दई देवता हो अमर न जग संसार भवन में ,गरजत
अमर जल पद की चून्‍दरी हो अमर लागुरिया की पाग भवन में ,गरजत
अमर भगतानी की चूदरी हो अमर धानू की पाग भवन में

Tag-माता के लोकगीत - कन्द कुल्हाड़ी - Mata ke Lokgeet - Kand Kulhadi



Post a Comment