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 Mata Ke Lokgeet- Long,Guggl

माता के लोकगीत - लौंग -गुग्गल -Mata Ke Lokgeet- Laung,Guggl

(गुग्गल - Guggl )

पंडित पर्वत जइयो जय जय मोरी माय 
भगवत राय जइयो जय जय भोरी माय 
भगतानी पंडितानी को गोद रहियो जय जय 
भगतानी बड़ी चतुर है जय जय 
पंडितानी बड़ी चतुर है 
नहा धोय की गुग्गल खेवे जय जय 
बाको धुँआ धौलागढ़ पहुचे जय जय 
बाको लौटा भवन में पहुचे जय जय 
वो खेबे वारे की मैया जय जय 
वो खेवे सदा सुहांगन जय जय 
वो खेबे सदा सपूती जय जय 
एक छ्किया भोजन पावे जय जय 
धरती पर आसन डाले जय जय 
मुह धोवे नाक न धोवे जय जय 
बाके संग न सखी सहेली जय जय 
वो खाय गई gud की भेली जय जय 
वो नाय दे एकु डेली जय जय 

(इसी प्रकार अपने घर के सभी आदमियों के नाम लेती जाये  )

(लौंग  -Laung )

लौंग बोय  दई भवन विच दो क्यारी 
धांधू ने बोई पंडित ने सिंची ,
तो भगतदास ने तोड़ ली दो क्यारी 
लौंग बोय  दई रे 
मैया चाची ने खेई दो क्यारी 
लौंग बोय  दई रे 
बाबुल ने बाई चाचा ने सींची 
तो भईया ने तोड़  ली दो क्यारी 
और भाभी ने खेई दो क्यारी 
लौंग बोय  दई रे 
नाना मामाँ ने बोए मौसा ने सींची 
तो  जीजा फूफा ने तोड़ ली दो क्यारी 
ओर्र बुआ बहना ने खेई दो क्यारी 
लौंग बोय  दई भवन विच दो क्यारी 
लौंग बोय  दई रे 

(इसी प्रकार अपने घर के सभी आदमियों के नाम लेती जाये  )

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