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 -Mata Ke Lokgeet- Jvala Mata Ke Geet

माता के लोकगीत -ज्वाला माता के गीत -Mata Ke Lokgeet- Jvala Mata Ke Geet

कहाँ जाओगी ज्वाला ऐसी गरमीं में 
 पछताओगी ज्वाला ऐसी गरमीं में 
ज्वाला बगीचा लगाओ ऐसी गरमीं में 
कालिया दियो छिकवाय  ऐसी गरमीं में 
ज्वाला कुआं खुदाय ऐसी गरमीं में 
साड़ी दियो धुलवाय ऐसी गरमीं में 
ज्वाला गगरी भरवाय ऐसी गरमीं में  
पानी दियो पिलवाय ऐसी गरमीं में 
ज्वाला महल  री बनाय ऐसी गरमीं में 
खिड़की दियो बनवाय ऐसी गरमीं में 
ज्वाला रसोई तपाय ऐसी गरमीं में 
पुडी दई शिकवाय ऐसी गरमीं में 
कन्या दई है जिमाय ऐसी गरमीं में 
ज्वाला सेज री ऐसी गरमीं में 
 बिछाया मैया दई है सुलाय ऐसी गरमीं में 
लांगुर धोरे उनकी व्यार ऐसी गरमीं में 
जाती दावें उसके पैर ऐसी गरमीं में

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