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शादियों में रतजगा की रस्म के बारे में हम  आपको पहले बता चुके  है उस रात को कई प्रकार के गीत गाये जाते है उनमे हल्दी,मेहदी तथा तेल के गीत भी होते है रतजगा की रात को घर की सभी महिलाए मिलकर गीत गाती है ततः उसके अगले दिन वर तथा कन्या के  हल्दी घर हल्दी की रस्म होती है इसे तेल चढ़ाना भी बोलते है आइये देखते है तेल के कुछ गीत 

 Shadiyon Main Ratjaga Tatha Tel ke Geet

शादियों में रतजगा तथा तेल के गीत - Shadiyon Main Ratjaga Tatha Tel ke Geet

तेल के गीत -1

बेलो बेलो री हमारो बेलना 
ऐ कोन ने न्योतो बेलना और कोन ने न्योतो है लटठ
अलबेली री हमारो बेलना 
ऐ वो चमेली ने न्योतो है बेलना और जौदराय ने न्योतो है लटठ 
अलबेली री हमारो बेलना
ऐ वो लुढकत आवे बेलना और फुदकत आवे लटठ
अलबेली री हमारो बेलना

तेल के गीत- 2

ओच्छी कढाई पूरो तेल महापूजिन मैदा घोर 
दादी तेरे महल में जाएगो कोन 
दादो तेरे गुलगुले खायेगो कोन
माटी को मटीलना जौडरी को खेत 
धर ललकारी डारी आई  पेट 
दादी तेरे महल में जाएगो कोन 
दादो तेरे गुलगुले खायेगो कोन

तेल के गीत- 3

केसरिया चली खटीक के 
उसके बेटा ने दी पुकार 
सहेली की अम्मा ने सुनी 
बेटा मत रे डरो मत डरा  करो 
और ले आऊ वही छटना और सूप 
सहेली की अम्मा ने सुनी 

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