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  Banni Ke Geet - Kiya Banni Ne Solah Srangar

बन्नी के गीत - किया बन्नी ने सोलह श्रंगार - Banni Ke Geet - Kiya Banni Ne Solah Srangar

किया बन्नी ने सोलह श्रंगार किसी की नजर ना लगे
बन्नी सज धज के हो गई तैयार किसी की नजर ना लगे

 बन्नो हमारी की मन रंग चुनरिया 20 वीं सदी है 21 की उमरिया 
भोली सूरत है मन में है प्यार किसी की नजर ना लगे 

किया बन्नी ने सोलह श्रंगार किसी की नजर ना लगे
बन्नी सज धज के हो.........
चंपा चमेली का गजरा बनाया 
फूल और कलियों से जूडा सजाया (2)
बन्नी बागियों में आई बहार किसी की नजर ना लगे

किया बन्नी ने सोलह श्रंगार किसी की नजर ना लगे
बन्नी सज धज के हो.........
गोर गोर गाल और होठ है गुलाबी   
घुघराले काले बाल आँखे लाजबावी (2)
सुन्दर नैनो में कजरे की धार किसी की नजर ना लगे

किया बन्नी ने सोलह श्रंगार किसी की नजर ना लगे
बन्नी सज धज के हो.........
मंडप में आ गई बन्नी बन ठन के   
चूड़ियां कंगना खनाखन खनके (2)
पायल करती है झन झन झनकार किसी की नजर ना लगे

किया बन्नी ने सोलह श्रंगार किसी की नजर ना लगे
बन्नी सज धज के हो गई तैयार किसी की नजर ना लगे

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