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  Shadi Sangeet- Janakpur Ki Jyonar

शादी संगीत - जनकपुर की ज्योनार - Shadi Sangeet- Janakpur Ki Jyonar


राजा जनक दई है ज्योनार सजाना सब हरे हरे सजन जैमन आये 
होत अवार जनका राजा के दिए चरण धुलाये उज्जल सुगढ़ बिछोना कीजे 
आँगन दिए बिछाए परोसन हारे हरे हरे परोसन हरे बुलवाय 
राजा जनक दई ..........

मंडप नीचे दसरथ बैठे और चार सूत साथ चारो और बाराती बैठे 
पत्तर दई डलवाय सखिन मिल हारे हरे हरे सखिन मंगल गाये 
राजा जनक दई ..........

परसी भोलुआ और सकोरा पर्सन फिरे कगार कंचन कलश बारे गंगाजल 
पारस बांध कतार परस में माई हरे हरे पारस में माई फिर आये 
राजा जनक दई ..........

लुचई पुड़ी और कचोरी पसरी खास्तेदार खुरमा हलवा और इमारती दई
जलेबी झुकाय पेडन में पिस्ता हरे हरे पेडन में पिस्ता दये डलवाय 
राजा जनक दई ..........

 मोती चूर मगध के लड्डू चार चार रख देऊ बर्फी की गिनती है नाय 
मनचाहे सो लो दही में बुरो हरे हरे दही में बुरो डलवाय 
राजा जनक दई ..........

गूंजा परस खांड के पागे मांग बाराती खाय कलाकंद रसगुल्ला परसे 
फिर घेवर को खाय बाराती मन में हरे हरे बाराती मन में मुसकाय 
राजा जनक दई ..........

दाख गिरी बादाम छुआरे दिने बर्क लगाय दूध लपसी में घोर मिलायो 
खाए सहारत जाय मलाई खोवा हरे हरे मलाई खोवा फिर लाये 
राजा जनक दई ..........

नरम मिठाई बूढों को परसों राबड़ी लच्छेदार मोहन भोग परसों 
फिर देओ माल पुआ बूढ़े मन में हरे हरे बूढ़े मन में हरसाए 
राजा जनक दई ..........

मठरी और पगेमा मट्ठे आगे परसे जाय और सकलपारे रस पागे 
खाते सहारत जाय बाराती मन में हरे हरे बाराती  मन में मुसकाय 
राजा जनक दई ..........

अरवी आलू और रतालू सरस बनी जिमीकंद केला गेर टमाटर गोभी 
लगो हीग को  सुगंध चटपटे हरे हरे चटपटे दये छुकवाय 
राजा जनक दई ..........

घिया भिन्डी बेंगन लौकी टिंडे बने अनूप कुदार कचरिया और करेला 
देत बरातिन भूख साग फिर हरे हरे साग फिर मंगवाए 
राजा जनक दई ..........

सोया सरसों पलक मैथी सेम फली कचनार पूरी बांकला खुरती सेंगरी 
परसों सभी संभार रायते हरे हरे रायते फिर आये 
राजा जनक दई ..........

बूंदी मेवा के बने रायते लगो कपूर धुगार कसीफल बथुआ घुलवाये 
दिए मसाले डाल बरी बरी से हरे हरे बारी बरी से परसाए 
राजा जनक दई ..........

 दही बड़े और पापड़ फेनो मठरी मोमनदार तरह तरह के बने मुरब्बा 
सौंठ मसालेदार बाराती में में हरे हरे बाराती मन में लुभायाने 
राजा जनक दई ..........

निम्बू आम आवले अदरक बांस की सरस अचार मिर्च करौंदा अरवी गट्टा 
गाजर देत बहार लभेड़े टेंटी हरे हरे  लभेड़े टेंटी मन भाए 
राजा जनक दई ..........

चटनी खूब सलोनी कहिये चाखत जीभ लुभाय हींग चटक्के चूरन टक्के 
बाराती खाय हरे हरे बाराती खाय के हरसाय 
राजा जनक दई ..........

फली सेंजने आक का पत्ता बहुतक सरस अचार बंधी पोटली भरे मसाले 
परसे सजन अगार जनक के हरे हरे जनक के पर्चाये 
राजा जनक दई ..........

जो ज्योनार नाजक ने दीनी सो का पावे पार धन दौलत की कहा  चलावे 
दई अनेको धाय सीता जी जिनसे हरे हरे सीता जी जिनसे सुख पावे 
राजा जनक दई ..........

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