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माता के लोकगीत -माता के सोने के गीत (पौढना )   - Mata ke Lokgeet - maata ke sone ke geet (paudhana )

भवन विच पौढिये भोली माँ 
काहे की मैया चन्दन पलकिया काहे बान बुनाये 
अगर चन्दन की चन्दन पलकिया रेशम बान बुनाये 
रेशम की मैया नरम गेदुआ मखमल की सौर भराये 
व्यार करत मैया मेरी बइयां दुखत है रात जगत दोउ नेंन 
चूड़ा चढ़ाऊँ तेरी नरम कलैया कजरा भराऊँ दोउ नेंन 


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