मकर संक्रांति का महत्व - Importance of Makar Sankranti

पौष मास (paush maas ) में पडने वाली संक्रान्ति (Sankranti) को मकर संक्रांति (Makar Sankranti) कहते हैं। जब सूर्य मकर राशि (Makar Rashi) पर आता है उस दिन मकर संक्रान्ति (Makar Sankranti) मनाई जाती है कहा जाता है किऐसा जाता है कि मकर संक्रांति (Makar Sankranti) के दिन तिल के दान का बहुत महत्त्व होता है तो आइये जानते है - मकर संक्रांति व्रत विधि और पूजा विधि Makar Sankranti Vrat Vidhi in Hindi

मकर संक्रांति का महत्व -  Importance of Makar Sankranti


मकर संक्रान्ति पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायणी भी कहते हैं मकर संक्रान्ति को  तमिलनाडु में पोंगल नामक उत्सव के रूप में मनाते हैं जबकि कर्नाटक, केरल तथा आंध्र प्रदेश में इसे केवल संक्रांति ही कहते हैं।
मकर संक्रांति के दिन दाल और चावल की खिचड़ी इस पर्व की प्रमुख पहचान बन चुकी है मकर संक्रांति के दिन गुड़ और घी के साथ खिचड़ी खाने का महत्व है। इसेक अलावा तिल और गुड़ का भी मकर संक्राति पर बेहद महत्व है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर तिल का उबटन कर स्नान किया जाता है। इसके अलावा तिल और गुड़ के लड्डू एवं अन्य व्यंजन भी बनाए जाते हैं। इस समय सुहागन महिलाएं सुहाग की सामग्री का आदान प्रदान भी करती हैं। ऐसा माना जाता है कि इससे उनके पति की आयु लंबी होती है बहुत सी जगहों पर गुड़ की गौर (पार्वती ) की पूजा करने का भी महत्त्व होता है 

मकर संक्रांति गंगा स्नान और दान का पर्व भी कहा जाता है। मकर संक्रान्ति को खिचड़ी नाम से जाता हैं। इस दिन उड़द, चावल, तिल, चिवड़ा, गौ, स्वर्ण, ऊनी वस्त्र, कम्बल आदि दान करने का अपना महत्त्व है ऐसी मान्यता है की मकर संक्रांति को किया गया दान सौ गुना फल देता है इस दिन किए गए दान से सूर्य देवता  भी प्रसन्न होते हैं। 

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